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मंगलवार, 5 जनवरी 2010

लेखन का नया फैशन

आजकल लेखन में नया फैशन है अपने जीवन की कहानियों और किस्से  को संसस्मरण के बजाये नोवेल बोलना . अपने जीवन की अन्तरंग बातें और उनसे सीख को एक धागे में रोचक ,मसालेदार तरह से पेश करना . वसे में तो एक बहुत ही गुमनाम लेखिका हु ,पता नहीं अच्छी हु या बुरी ....बस आपने आस पास की गतिविधियों को शब्द दे देती हु जो कभी कुछ   पत्रिका गलती से छाप  देती है  . अब सोच रही हु क्यों न में भी अपना संसस्मरण निकाल दू . बचपन से आने वाले बुढ़ापे  तक का ........यहे अब लगा की लेखन में भी बहुत पैसा है ..थोडा सा प्रोफ़ेस्सिओनल हो जाये तो बस ......किताब ..फिर फिल्म और न जाने क्या क्या ?पर अपना दिल काम और दिमाग ज़यादा इस्तेमाल करना होगा और मार्केटिंग अच्छी करनी होगी ..पूरी  तैयारी  के साथ उतरना होगा जल्दी से जल्दी इससे पहले की ऐसे लेखको की बाढ़ आये ........

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