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बुधवार, 16 दिसंबर 2009

कितने धन्यवाद् दू

अदभुत   एहसास  की  साक्षी हु ,
नारी के दुसरे जनम की भोगी हु,
एक जीवन की सूत्रधार बनी हु,
ममता के अनमोल उपहार की,
 जीवन के यादगार पलो की ,
अपने अस्तित्व की नयी परिभाषा की,
वंशबेल के प्रवाह की ,
एक माँ के समर्पण और सम्पूर्णता की ,
उसके आगाथ प्रेम की गहरायी की ,
आंचल की शीतलता की ,
स्पर्श के गर्माहट की ,
एक अटूट ,निर्मल, निश्चल ,  बंधन की ,
कितने धन्यवाद् दू उस भगवान को जिसने यहे नेमत दी.

1 टिप्पणी:

अजय कुमार झा ने कहा…

आपको बहुत बहुत बधाई हो जी ..

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