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मंगलवार, 29 दिसंबर 2009

नया साल

साल दर साल गुजरते जाते है
हम फिर भी वही रह जाते है
कभी अपनों को छोड़ के
कभी अपने हमको छोड़ के
ज़यादा कुछ नहीं बदलता बस
एक अरसा हो राह है यह याद आता है
कभी  नहीं सोचा कुछ नया कर दे कुछ बदल दे
टूटे रिश्ते जोड़ दे ,गरीब का नया साल बना दे
भूखे नागो को पुराने साल के कुछ कपडे दे दे
वसे तो नए साल नए कपड़ो में पुरानी मान्सिकता लिए जी  रहे है
तेज़ संगीत में बिन कपडे के सिकुते लोगो के आह नहीं सुन पाते 
शराब के जमो में पानी तरसते लोगो की याद नहीं है
नए साल की रात धुत रहते लोगो को पुराने साल की सब भूल गए  है
कौन सा नया कल भी वोही था लोगो के लिए
उसी  दिककत  के साथ बीत गया एक और साल
बदला  है कुछ के लिए बेसुध है वो आज साल शरू करने के लिए

3 टिप्‍पणियां:

श्यामल सुमन ने कहा…

कुछ भी नया नहीं है फिर भी नये साल का यह पैगाम
आशा है कि सब कुछ शुभ हो सपनों का सुखमय अंजाम

सादर
श्यामल सुमन
09955373288
www.manoramsuman.blogspot.com

समयचक्र ने कहा…

नववर्ष की हार्दिक शुभकामना

Udan Tashtari ने कहा…

बढ़िया रचना!!


यह अत्यंत हर्ष का विषय है कि आप हिंदी में सार्थक लेखन कर रहे हैं।

हिन्दी के प्रसार एवं प्रचार में आपका योगदान सराहनीय है.

मेरी शुभकामनाएँ आपके साथ हैं.

नववर्ष में संकल्प लें कि आप नए लोगों को जोड़ेंगे एवं पुरानों को प्रोत्साहित करेंगे - यही हिंदी की सच्ची सेवा है।

निवेदन है कि नए लोगों को जोड़ें एवं पुरानों को प्रोत्साहित करें - यही हिंदी की सच्ची सेवा है।

वर्ष २०१० मे हर माह एक नया हिंदी चिट्ठा किसी नए व्यक्ति से भी शुरू करवाएँ और हिंदी चिट्ठों की संख्या बढ़ाने और विविधता प्रदान करने में योगदान करें।

आपका साधुवाद!!

नववर्ष की बहुत बधाई एवं अनेक शुभकामनाएँ!

समीर लाल
उड़न तश्तरी

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