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शुक्रवार, 18 दिसंबर 2009

नियति

सिमी क्या हुआ इतनी दुखी क्यों है ?आज फिर अतुल से लडाई हुए क्या ?
हाँ सुधि ,रोज़ का नाटक सा हो गया है कोई नयी बात नहीं होती लड़ने के लिए .....वोही रोज़ की घिसी  पिटी बातों पे लडाई होंने लग गयी है ................
सिमी संभल अपने आप को कितनी बिंदास थी तू हर समस्या का हल था तेरे पास फिर क्या हुआ आज

सुधि में कितनी भी कोशिश करू खुश करने की खुश ही नहीं होते.... समझ में नहीं आता क्या समस्या है --कभी लगता है ...मेरा हँसना पसंद  नहीं ,रोंना बर्दास्त नहीं होता ,मेरा विचार बच्चो का लगता है ,मुझे  समझ है ही नहीं ,अकेले यहं नहीं रहना कहते ..अपने परिवार के साथ रखने पर लगता है की में सही से व्यवहार  नहीं करुँगी ,फ़ोन पे बात नहीं कराते  क्योंकि में उतनी कैरिंग नहीं लगती ,यहं किसी से मिलना  नहीं चाहते क्योंकि यहं अच्छा ग्रुप नहीं है ,मेरा दोस्त मझसे बात करना यहे पसदं नहीं ....में बहार जाऊ यहे पसंद नहीं ,पार्लर एक्स्ट्रा खर्च है , आगे पढ़के  क्या करुँगी , जॉब में कुछ नहीं मिलता , कोई पेंटिंग या क्रोचिया करू तो सुन्दर नहीं होता .....मेरा तो अस्तित्व डगमगा गया है ...........बर्थडे इन्हें पसंद नहीं ,गिफ्ट इन्हें पसंद नहीं, सफाई पसंद नहीं सामान जगह पे रखना पसंद नहीं ,कोई बात याद  नहीं रहती तो में याद क्यों नहीं दिलाती , हर बात याद दिलाओ ...........कभी हुमदोनो का घूमना पसंद नहीं अपने दोस्तों को ले जाना चाहते है हर जगह ....कभी कोई रोमांटिक ड्राइव नहीं की रोमांटिक डिनर नहीं ,,,कभी कुछ एसा  नहीं की लाइफ स्पेशल होती है ,न ही मेरा साथ खाना खाना न मेरे साथ घूमना  .....कभी आज तक किसे बात केलिए मनाया नहीं रुलाया इतना है की हसना ही भूल गयी हु ....मुझसे बात करने के बजाये दूसरो से बात करना जयादा पसंद है ...........यह तक की शादी के बाद अगर रोमांटिक हु वो भी पसंद नहीं गुड मोर्निंग  किस देना पसंद नहीं .............................मतलब क्या करू ...अच्छा खाना बनाऊ तो कोई मतलब नहीं बुरा बनाऊ तो कोई मतलब नहीं ....यह पक्का है हर किसी  के सामने मुझे नीचा दिखाते है खाना बेकार है हँसते है मेरा मजाक बना दिया है ......में
 भूल गयी में क्या थी और आज क्या हु ....
सुधि
 तुझे समझदारी से काम लेना होगा  ..सारे पति होत्ते है ऐसे ही होते है ....
सुधि में मानती हु सब ऐसे ही होते है क्या पत्नी के लिए वो अलग होते है इतने अलग के उसकी सुध ही न हो ?.........वसे सारी दुनिया का हाल चल पुछा जाता है सारी  दुनिया के रिश्तेदारों का बर्थडे याद रहता है  सबकी
 विश किया जाता है ...................कभी मेरा हाल नहीं चाहिए मेरी तबियत कितनी ही ख़राब हो ... मेरा हाल नहीं पूछ सकते .....मैंने नहीं कहा की मेरे लिए काम करो या खाना दो या पानी दो बस प्यार के दो बोल बहुत है पर ..........मेरी दवाई कभी याद नहीं रहती घर वालो की दवाई दस बार याद दिलाते है उन्हें .....
कोई कितना पैसा मांगे सब दे देते है में एक पैसा मांगू तो हिसाब रखते है
मेरी कोई चीज़ मेरा कोई काम पसंद नहीं है मेरी सारी अच्छाई जो मुझे पसंद थी अब खो सी गयी है
में खोखली  हो रही हु ...मेरे जज्बात ,   मेरी कोई कद्दर ही नहीं है ......मेरी ज़रूरत नहीं बस दुनिया को दिखने के लिए शादी करनी थी तो कर ली .....और अब यह और सुनो को मेरे आने  की वजह से अब कुछ अरमान बाकि नहीं है सब ख़तम  हो गए ..में इन्हे परिवार से दूर कर रही हु ...जबकि कोई मुझे अपना मन ही नहीं पाया है .......अपना परिवार के लिए सुनु और भी न जाने क्या क्या ...धमकी  भी की में कुछ भी कर सकता हु अब तो लगता है में पड़ा ही गलत हो गयी या मेरी शादी गलत हो गयी जसी लड़की अतुल को वैसे  थी वो मिली नहीं .....मेरी हर बात मेरी हर चीज़ बुरी लगती है कभी कुछ फर्क नहीं पड़ता में कब रोये या में कब टूट गयी अन्दर तक ..मेरा मर जाने का मन  करता है .....मैंने कभी नहीं सोचा था गहर वालो की  लाडली लड़की ससुराल में ..बल्कि मेरा पति इतना  खफा रहेगा मुझसे........
जी छोटा न कर सब ठीक हो जायेगा .......
नहीं सुधि अब कुछ ठीक नहीं हो सकता अतुल सिर्फ उपरी तुर पर मुझसे जुड़े है दिल से नहीं ,में पूरी तरह इन्हें अपना चुकी हु यहे मुझे अभी तक नहीं अपनापये है और कभी अपना भी नहीं पाएंगे .............इनके परिवार और अब तक की जितनी भी शादिया है सब में एक गेरजिम्मेदार सम्बन्ध रहे है ...तो अतुल ने कभी नारी के कोमल मन को नहीं देखा ...उसने उसका अबला वाला  ही रूप देखा है इसलिए वो मुझे भी जूते की नोक ही समझते है उन्हें लगता है
मुझे अगर कोई बात करना चाहए तो क्या कर नहीं सकता .......पर इनका मन नहीं करता मुझसे बात करना का लेकिन कभी नहीं मेरी बात सुनना ही नहीं चाहते दोस्त ज़रूरी है मुझे से कहीं ज़यादा .....हर बार हर समझोता में करू यहे नहीं करंगे कभी पहल शायद करना नहीं  चाहते
सिमी यहे शादी इस्सी का नाम है ..हम दो पहिये है जीको साथ चलना ही नियति होत्ता है वो अलग नहीं रह सकते और एक के बिना दूसरा अधुरा  है  यहे तेरे या अतुल के बीच नहीं ..हर स्त्री पुरुष के बीच होता है  कारण अलग अलग होते है .
शायाद तू ठीक कहती है सुधि अब मन को हल्का लग राह है तुझसे बात करके  हलाकि में चाहती  हु की अतुल मुझसे बात  करे पर ....यहे हमारा मन भी कुछ जयादा ही सोचता है और उलझ जाता है ....जबकि अटल जसे अच्छे इन्सान  नसीब वालो को मिलते है पर वो सपनो के राजकुमार को याद करने लगते है और अपनी ख़ुशी के लिए निकल पड़ते है ....
चल अब जा और अच्छा सा खाना बना .

2 टिप्‍पणियां:

SAMWAAD.COM ने कहा…

सही कहा, नियति के आगे सब बेबस हैं।


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जिसपर हमको है नाज़, उसका जन्मदिवस है आज।
कोमा में पडी़ बलात्कार पीडिता को चाहिए मृत्यु का अधिकार।

अजय कुमार झा ने कहा…

बहुत सुंदर कहानी है रितु जी ...सच कहा आपने नियति सब कुछ पहले ही तय करके रखती है

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