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बुधवार, 16 दिसंबर 2009

आशा निराशा

निराशा है --
मचले हुए ख्वाब  को न पकड़ पाने की
कुचले हुए सपने के टूटने की
अपनों से दूरियों की
जीवन की नीरसता से
रोज़ की स्थिरता से
मन की रिक्त ता  से
जीवन की कठिनायों  से
रोज  की  झक झक से
पर आशा है -
इस जीवन से
सूरज के नयी किरण  से
 अपने सुन्दर आशियाने से
अपनों से सपनो से
अपने  कर्मो से
अपनी  आस्था से
उस निराशा से जिसने आशा का मतलब समझाया
उस उपरवाले से जिसने हर जीवन को एक मकसद दिया

1 टिप्पणी:

अजय कुमार ने कहा…

पर आशा है -
इस जीवन से
सूरज के नयी किरण से
अपने सुन्दर आशियाने से
अपनों से सपनो से
अपने कर्मो से

निराशा से उबरने का सही तरीका

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