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मंगलवार, 15 दिसंबर 2009

प्यारा तोहफा

एक मासूम किलकारी गूंजी  है मेरे आंगन में
मन को भिगो गयी उसकी  वो हसी
 अपने पुर्ण होने का एहसास मन को भिगो राह  है
छोटे हाथ छोटे पैर मासूम  सी आँखें
अपनी ओर बुलाती है
हलकी सी अह मन को परेशां कर देती है
कभी उसके बोलने की चाह उठती है
कभी उसके चलने की अह होती है
उसके जागने सोने से मेरा दिन रात होती है
मेरा प्यार मेरा अद्वित है
भगवान के इतना प्यारा  तोहफा  कभी नहीं मिल सकता

8 टिप्‍पणियां:

श्यामल सुमन ने कहा…

किलकारी गूँजी जहाँ आँगन बनता खास।
किसी भी माता के लिए बहुत सुखद एहसास।।

सादर
श्यामल सुमन
09955373288
www.manoramsuman.blogspot.com

Udan Tashtari ने कहा…

सुन्दर!!

अजय कुमार ने कहा…

matritva ka sundar varnan

हिमांशु । Himanshu ने कहा…

बेहद खूबसूरत ! आभार ।

अजय कुमार ने कहा…

pl.correct the word "tofaha" as TOHAFA

sada ने कहा…

बहुत ही सुन्‍दर भावों से अनुपम प्रस्‍तुति ।

M VERMA ने कहा…

बेहतरीन प्रस्तुति और सुन्दर तोहफा

Rajey Sha ने कहा…

इस कवि‍तानुमा के शीर्षक में "तोफहा" लि‍खा है, इसे "तोहफा" कर लेंवें।

इस गैज़ेट में एक गड़बड़ी थी.