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बुधवार, 4 नवंबर 2009

भाग गम भाग

सपनो के पीछे कितने भागे  है, धरातल ने बचा लिया
असमानों में कितनी बार उडे है ,सूरज की रोशनी  ने बचा लिया
तारो को पकड़ने के लिए मचले है, चंदा के चांदनी ने बचा लिया
अन्तरिक्ष में जाना चाहं है आकर्षण ने  रोक लिया
इस दुनिया में डूबे और तर गए
जाने क्या बात है ज़िन्दगी दी तो मौत का बहाना बना लिया
मौत आई  तो जीवन की चाह को जगा दिया
मत्तमेले दिल को देखा और नरक का रास्ता दिखा दिया
अच्छे काम सोचे लगे तो एक के आगे भी न बढे .

6 टिप्‍पणियां:

श्यामल सुमन ने कहा…

लिखने की कोशिश भली भाव बने हैं खास।
रचना बेहतर और हो करते रहें प्रयास।।

सादर
श्यामल सुमन
09955373288
www.manoramsuman.blogspot.com

naturica ने कहा…

title padh kar hi maza aagaya ...likhti rahiye.."Happy blogging"
orkut ब्लॉग की sidebar में

Mithilesh dubey ने कहा…

बेहतरीन रचना। बधाई

BAD FAITH ने कहा…

अच्छे काम सोचे लगे तो एक के आगे भी न बढे . यही बेबसी है.

परमजीत बाली ने कहा…

सही लिखा-
अच्छे काम सोचने लगे तो एक के आगे भी न बढे .

तभी तो आदमी कई बार बेबस सा नजर आता है।सुन्दर रचना है।

M VERMA ने कहा…

मौत आई तो जीवन की चाह को जगा दिया
बहुत सुन्दर पंक्ति है

इस गैज़ेट में एक गड़बड़ी थी.