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गुरुवार, 5 नवंबर 2009

मर्यादा

मर्यादा की सीमा का कुछ तो परिचय दो
बहु बेटी की मर्यादा का अलग हिसाब तो न रखो
देवी सीता ने भी अग्नि परीक्षा दी  थी
मर्यादापुरोशोतम  राम के कारन
नारी की मर्यादा की रेखा याद रही
पुरुष की नजरो का भेद
 विचारो का ओछापन क्यों नहीं बंध पाया सीमा में
राम की परीक्षा से सबक तो ले लिए
 सीता के अपमान  के विरूद्व कोई पुरुष नहीं आया
धरती माँ ने समां लिया और नारी को धरती का वारिस बना दिया
कितनी ही सीता ने परीक्षा दे धरती माँ ने संभला है
 धरती माँ ने अपना आँचल हिला दिया तो
जिसने इस मूरत का सम्मान नहीं किया
उसका अस्तित्व नहीं बचेगा चाहे वो नारी हो या नारी
समर्पण,सहनशील ,संतोषी,शालीन नारी के अपमान का घडा भेरेगा
धरती द्वारा प्रलय आयेगा सारी ज़िन्दगिओं को तबाह कर जायेगा .
जीवन में नारी के प्रकाश का महत्व समझ में आ जायेगा

4 टिप्‍पणियां:

naturica ने कहा…

good going....keep blogging...Happy blogging
श्रीमती के नाम ghazal

Udan Tashtari ने कहा…

सुपर...सुन्दर रचना!

श्यामल सुमन ने कहा…

बिन नारी सूना जगत नारी जीवन धार।
सृजन भाव ममता लिये नारी से संसार।

सादर
श्यामल सुमन
09955373288
www.manoramsuman.blogspot.com

Meenu Khare ने कहा…

अच्छा लिख लेती हैं आप. बधाई स्वीकारें.

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